वह पहले तुम्हे सही ज्ञान देता है, तुम्हे तुम्हारी वास्तविक शक्ति का बोध कराता है, कुल मिलाकर वह तुम्हारी नजरो मे अच्छा व्यक्ति बन जाता है, फिर वह आयोजन करता है की तुम्हारे सामने किसी बुरे/दुष्ट व्यक्ति से मार खाये या अपमान झेले और जब तुम उसे मार खाते हुए या अपमान सहते हुए देखते हो तो तुम अपनी मान्यताओ/बंधनों/नीतिओ को तोड़ कर उसकी रक्षा करते हो और दुष्ट का विनाश करते हो अर्थात् जब जब तुम धर्म की हानि होते हुए देखते हो और धर्म की रक्षा के लिए अपने बंधनों को तोड़ते हो तो तुम्हारे ही भीतर से सत्य/कृष्णतव् पैदा होता है
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